आज तो बिजली चमकेगी
चकमक चकमक चाव चकेगी
चुलबुली चाल गोदी मचलेगी
१४ बरसो के रात-दिन का जन्म
गोदी के ख़ाली नाम पुन्र प्रवेश का नमन
आधि बूंद की आदि बिजली का बंधन रमन
जनम दिन(रात) मुबारक हो ख़ाली जाम अमृतम अमन
आज तो बिजली चमकेगी
चकमक चकमक चाव चकेगी
चुलबुली चाल गोदी मचलेगी
१४ बरसो के रात-दिन का जन्म
गोदी के ख़ाली नाम पुन्र प्रवेश का नमन
आधि बूंद की आदि बिजली का बंधन रमन
जनम दिन(रात) मुबारक हो ख़ाली जाम अमृतम अमन
u-nit-y con-sci()us()ness
on _hol()ness
()es
l_ate y in()ide u
gut _ur()ace()all wor_d
अब भरपूर तो सास में है
पूरा बेशरम और है पूरा बद()मीज़
खेंचे भरपूर कमीज़
gut गोदी का सूखा क्या करेगा
खींचेगा लकीर न लाँघ
सजे पूरा अकील ख़ाली बैठो
बूझो ख़ाली खील
बुरे वक़्त में भार(भरपूर)पका पैसा
काम()आया अंदर भरपूर लाया
ने gut गोदी को
बुरा भरपूर
दिखाया
y in()id u ne_er un_er-s()ood
nothing ne_er no u
राहु ने सोमरस तो निगल लिया
लेकिन गले से निचे नहीं उतरा
न ही उतरेगा किसी भी युग में
धढ़ क्या करेगा शरीरो के बगैर
तो बोलो आधे की ख़ाली खैर
अनगिनत सास की भरपूर किताब
आज ही होगा भरपूर ताव का हिसाब
दिल थाम के रखो अदर हिज़ाब
इधर उधर लेगा एक एक का नवाब
बहार न निकले ज़ुबान का रुबाब
देखो अंदर ही रहे इत-काम का
भरपूर जवाब
आधे कही भी रहे गोदी के अंदर रावा
सारी गोदी का पता पत्ता मावा
आधे गोदी का ख़ाली बावा
gut ज़मीन उगले आधे भरपूर लावा
बस करो आधे
और नहीं वाह देह
gut गोदी को न मिला ख़ाली तेह
कौन भगाये भरपूर भय
रात-दिन न जगे ख़ाली लेह
आप ही करो ख़ाली मेह
जहां सूर्य की रौशनी नहीं
वहां है gut गोदी का अँधेरा ढूंढे
अंदर की ख़ाली रोहिणी का
सफेरा
You must be logged in to post a comment.