ख़ाली जाम

आज तो बिजली चमकेगी


चकमक चकमक चाव चकेगी


चुलबुली चाल गोदी मचलेगी


१४ बरसो के रात-दिन का जन्म


गोदी के ख़ाली नाम पुन्र प्रवेश का नमन


आधि बूंद की आदि बिजली का बंधन रमन


जनम दिन(रात) मुबारक हो ख़ाली जाम अमृतम अमन

खींचेगा लकीर

अब भरपूर तो सास में है

पूरा बेशरम और है पूरा बद()मीज़

खेंचे भरपूर कमीज़

gut गोदी का सूखा क्या करेगा

खींचेगा लकीर न लाँघ

सजे पूरा अकील ख़ाली बैठो

बूझो ख़ाली खील

आखरी जवाब

अनगिनत सास की भरपूर किताब

आज ही होगा भरपूर ताव का हिसाब

दिल थाम के रखो अदर हिज़ाब

इधर उधर लेगा एक एक का नवाब

बहार न निकले ज़ुबान का रुबाब

देखो अंदर ही रहे इत-काम का

भरपूर जवाब