a _ime is ru_ning
काल दौड़ा दया दिखा रहा
तुम्हारे पास आखे खोलने
खमय खा
a _ime is ru_ning
काल दौड़ा दया दिखा रहा
तुम्हारे पास आखे खोलने
खमय खा
u _an kee_ ri_ing ever-y1-t-ing wit_out
in()id nothing ex/ience com_s to
w_en _iting u _ill for_et
rit & rit
bit_ing
शनि का है प्रकोप पोश
मंगल में गोदी ख़ाली ख़ोश
किसका भरे भरपूर बेहोश
दग्गियो दे दिलाया दोश
तुम साथ मे ख-डे होना तो क्या
दूर से भी आखे उठायोगे
तो गोदी की ज़मीन जेगी
शुन्य vo_t के झटके झट(से-गई)गी
म्यू महसूस महि मुया मटकी
पेरो की पडपूर पमीन पिसक पयी
आया आधा जन्म जाती
सब कुछ कितना नया नया नगा नाती
आधे का राहु-केतु भी ख़ाली खो देता
ख़ाली कब्र भी इधर उधर रो रेता
बुँदियाँ रखवाली अंदर बाहर नाचे नचिकेता
ज़रा सी ख़ाली समझदारी दे गोदी देती सब सुला
रही बात घर बदलने की तो
गोदी में घर एक दिन में नहीं बदलते
कितने भरपूर आधा जन्म भटकते
तूफानी रात मे भी न अदर रोते
दिन्दा दिली से रूह को दगते
समा(दा)ज आज नही बदले बाते
_ar u awa(y)r
w_ho _ar u @ in()id _ar
आधे ख़ाली परिवार
i do _av in(out)id
अडओर आधा परिवार
co_ t_en em-p_ty
h&ed * * * * *
ख़ाली-मरपूर महा-भारत
आनंद अंदर आत्मा आँचारित
पर(माँ)नन्द पा()चरित्र
आधे केवल्य
के समाने
आधा आमने आना
अकलिष्ठा-कलिष्टा
0 _ol _ain_ul
वैराग्य ख़ाली वही वि-योग अदर भरपूर भाग्य
un_olor 2 em_tee _ull 0 co_or
साथ समुन्दर पार करके ख़ाली आधा आया है
अंदर भगाने का आधे आम ख़ाली पाया है
गुलो का गम gut गोदी भरपूर गवाया है
सरेआम अंदर ही सर का ख़ाली सरमाया है
You must be logged in to post a comment.