e_ec_ric ऊर्जा

तुम साथ मे ख-डे होना तो क्या
दूर से भी आखे उठायोगे

तो गोदी की ज़मीन जेगी

शुन्य vo_t के झटके झट(से-गई)गी

म्यू महसूस महि मुया मटकी

पेरो की पडपूर पमीन पिसक पयी

बर बदलो बति

आया आधा जन्म जाती
सब कुछ कितना नया नया नगा नाती

आधे का राहु-केतु भी ख़ाली खो देता
ख़ाली कब्र भी इधर उधर रो रेता
बुँदियाँ रखवाली अंदर बाहर नाचे नचिकेता

ज़रा सी ख़ाली समझदारी दे गोदी देती सब सुला

रही बात घर बदलने की तो
गोदी में घर एक दिन में नहीं बदलते

कितने भरपूर आधा जन्म भटकते
तूफानी रात मे भी न अदर रोते
दिन्दा दिली से रूह को दगते
समा(दा)ज आज नही बदले बाते

सरे-आम

साथ समुन्दर पार करके ख़ाली आधा आया है


अंदर भगाने का आधे आम ख़ाली पाया है


गुलो का गम gut गोदी भरपूर गवाया है


सरेआम अंदर ही सर का ख़ाली सरमाया है