तो-तुली

आधे तो gut की tot-al माँ(की)मूली है

इसी लिए गोदी की आग ख़ाली बबुली है

अंदर बाहर बोले ख़ाली आधे तो-तुली है

भीतर न समझे ख़ाली भू ति-तली है

आखे दिखाओगे तो ख़ाली की

भरपूर बिजली है

भार ढो

भरपूर से अपना भार ढो नहीं होता


और गोदी की चिंटी को दाना उठाते

देख कर प्रेरणा मिलती है


एह कौन बातयेगा चींटी की टांगे

gut गोदी का ख़ाली घर-भार उठा

के संभलके के चलती है

भरपूर को तो यह भी नहीं पास्ता

यह क्यो अदर क्या है, ढोने से पहले

इकठा करना जरूरी है