जिसकी ()रथी आसमान से उडे
वह क्या ज़मीन के अंदर से गिरे
ढूढते रह आओगे भरपूर सिरसिले
कौन से आधा जन्म जान जय जले
सजना साज सुदर सालो सिले
जिसकी ()रथी आसमान से उडे
वह क्या ज़मीन के अंदर से गिरे
ढूढते रह आओगे भरपूर सिरसिले
कौन से आधा जन्म जान जय जले
सजना साज सुदर सालो सिले
ख़ाली सूर्य की गर्मी से पिघला
जिन जिन आँखों ने सांसे ऊ-गला
हमारी धारो ने आस(ख़ाली)मान खि()ला
गोदी के मज़धारो ने ज़मीन ज़िग()ला
ख़ाली लती लकड़ी पे सटी सास गुस्सा गाया
बुँदिओ का ख़ाली आरो आड़े आम आया
देखो दो दया दाम दवा दम-दार दाया
अब किसे लूटे न लोट लाडा लहराया
अब गोदी का ख़ाली आपा-hiz
तो दूयीया की एक-एक सास का इधर-उधर का आपा
खारेगा ख़ाली आधा जन जन अंदर नापा
no _eet no g_eet
adhe is to()tal
em_tee fee_
an _elf-re()ali_ation of em_tee in()id 1_ess
to
a gut in()id em_tee 0 bre_ath
no()thing _om_ out of wi-thin
is in()id c_ose wi-thou_t
_ever- -thing
माया की अनुमति
करपूर कही कुचल कहता
गोदी की ख़ाली सृष्टि सन्मति
गोदी के अंदर आधा जन्म सांस ()नाता
और घर दूयीया के अदर
एक उची दूकान दाता
खामोश खरा खरगोश
गोदी का ख़ाली खरमाया ()दोष
मनाये सास मडपूर मदहोश
आधे बत्तियायें ख़ाली ख़ड़ा निर्दोष
ढूंढते ढ़होगे डग डगे आग़ोश
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