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हम है भरपूर नालायक
जडी जुबानो के नही नायक
सास का पूरा नाम खलनायक
जो न मिटे अदर वो ही बाहर
दबाये दायक
सृष्टि गोदी में कुत्ता भी शेर होता हा
घर के अदर असुरो की जुबान का
हेर फेर गडगूर गोता गा
नरपूर नाम को तेज भगाते
शरीर की मैल सास मे समाते
भरपूर भाव भरपूर साव साते
भर गये अदर दरपूर दाते
तेरी हसरत न होगी पूरी
बीच मे अदर है दगी दूरी
जो मिला मै फितरत तूरी
ले आया माफिला मजबूरी
नडायो नडा नरपूर नदर नूरी
आज की पडपूर पुस्तक
कल की दरपूर दस्तक
अदर न मिली फ़ुरसत
भिन भिनाये अदर बाहर
भिक्षुक की रद रुक्सत
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brea_hing _till
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खुद के अदर मारने के लिये शूद्र
बिंदु के लिए ब्राहमन न बना मुग्ध
बचे जो काटे क्षत्रिय जडपूर जाटे
न जताये प्यार वैश्य मरा मार माटे
गुरूजी का आशी()वाद
सुनाये नही
अदर मा का अनु(अंतिम)वाद
हमें तो कुछ-कुछ समझ सारा
यह शाति बायी क्यो उकसा रहा
हमें ही घर से बाहर निकलवा अहा
इस के तो काल के अदर कूडा काला
बहुत कुछ मिल—-भगत सगता साला
घर है दगना उछाल जल्दी वाला जाला
इसने सब है घर के अदर पता लिया
हम क्या करते है हर रोज पिया
देखे ध्यान से धार न धरे दिया
क्या उपाये है अंदर जिया
घर का मालिक ही न सुने
अनसुने आधे ध्यान धिया
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