खाया खे

भगवन को भी दिखता है
मईया को भी सुनता है
पर क्या करे तुम को व()न भाया है
रोग को निखार आया है
पीड़ा भीतर समाया है
समय भी तयारी करके लाया है
खरी खैर खारा ख़ास ख्याल खाया खे

बाझ

अच्छा अंदर के बचे चाहिए


तलवे पैदा करने के लिए


सास तो बाझ है


किसी भी जनम में पैदा कर सकती

थकती हर सास मैं

re()ot-oll

अच्छी आदतो की कमी

मेहंगायी बढ़ गयी है

व()न को तो फुरसत ही नहीं

रात के अँधेरे में

अरे कहा रखा है

व()न का re()ot con__ol

y() clandestine affair consume hol u dark()fullness