ऊंचा सुनने सुनाने से भरपूर
शरीर पूरा होता है
दुनिया जाये तूतू में में के डर के
झाड़ सारा दिखता है
gut गोदी को
भरपूर असुरो के सास के
दामाद की पूरी घूरी
ऊंचा सुनने सुनाने से भरपूर
शरीर पूरा होता है
दुनिया जाये तूतू में में के डर के
झाड़ सारा दिखता है
gut गोदी को
भरपूर असुरो के सास के
दामाद की पूरी घूरी
कच्ची ईंट-पत्थर-लकड़ी के घर
gut गोदी का खेल ख़ाली खेलते खा
तुम्हारे घर न तो ज़मीन पर है और
न ही तुम्हारी दुनिया के अंदर
दुनिया की गंध में इधर उधर की
भरपूर हवा बे-हाल है
आधे पर तो फूल भी नहीं म()रता
और तुम्हारी दुनिया की तूतू में में ने
भरपूर ईंटे उठा के फेंकी
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qu_et or no_s
in()id
y
on in()gre-y-d_ent
that _ich is _ast
_ache y in()id u
st_ong/we_k fa_t-er
असुर पाखन्डी
पायी ख()न्नी खादी इधर उधर खड
y in()id u hav _u()ned a
dual re(back)-y-ard for u
to reci()cle y _ard within
_ur()ac brea_ing each
birth’ u re()ard
ख़ाली मुँह से निकले आधे बाण
भरपूर जू को आधा-आधे
चीर चारते चय
अब आज के अंदर चुपी भरने की
ठान ही ली है तो त्यार हो जायो
पुरानी यारियो के बीमे की एक-एक
भरपूर बात बैठी है सास के दामाद में
गले गल गलाने गे
आज के अंदर चुप बैठ के आंखे
किसका खौफ खायी खा ख़ाली
डंडे का मासूस तो ख़ाली
है ना
ध्यान धरे
आधे की मौत की ख़ाली()आई से भी
ख़ाली डंडे म()सूस नहीं होते
लता है असुरो के भरपूर गले सीधे नहीं उतरेंगे
निवाले की मौत को सीधा रास्ता पास्ता
तो तूतू में में की दुनिया में
एक ज़हर न हासता
डरपोक अपने डर को ही पोक रिहा है
अब डर को तो खायी खोदने की खाहा
खड़ी खे खैदी खाद खरा खे
gut गोदी को भरपूर मौत सुला के
भरपूर व्यस्त है जीवन की बहार को
भरपूर सु()लाने में
आ गयी क्या
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