आखे

वेहली आंखे सास के दामाद को

भरपूर प्यार से पड़ती है


इसीलिए भरपूर प्यार की आखे

वेहले को ही स-वारती है

-ल

तूतू में में की दुनिया पूरी जेल

एक चोर एक सिपाही का भरपूर खेल

भरपूर आधा इधर उधर पूरा मेल

एक बाहर भागे एक अंदर रेल

अंदर का बच्चा वारा फेल

अब भागो आई सारी बूंदियो की

मईया का gut _op ख़ाली a-वेळ

निराली छाया बांधे ख़ाली gut गोदी ऐल

ख़ाली जन्म

पिछले द्वापर युग में कृष्णा का

जन्म जेल में हुआ ता

अदि-नाग की छाया ने मईया की

गोदी अंदर पहुँचःया च

इसी लिए अंदर का ख़ाली बच्चा ही

gut गोदी का सारा अर()माया मा

पडो

सास के दामाद की पढ़ाई बहुत हो

गयी gut गोदी तो पहले से हे डूबी पड़ी है

(पिछले, आज और आगे को मिला के

कलयुगा 2 कलयुगा

भरपूर ने तो इक ही काम भरना है)

दामाद तो हमेशा ही क्यों की निराशा

की आशा को ही पूरा पांडेगा