भरपूर ज़ुबान c_ock_ise नही घूमती
यभी तो
b_ack _it _oor un()ock
भरपूर का कब छुपा है आज का योग
भरपूर रोग के भोग
भरपूर ज़ुबान c_ock_ise नही घूमती
यभी तो
b_ack _it _oor un()ock
भरपूर का कब छुपा है आज का योग
भरपूर रोग के भोग
good mo()ning 2 good _ite
&
_ho is a()t-er _oon’ s_rite
every_ody is out for one b_ite
an evil in()id u is in
y c_ut_ch()s
f()ee godi’ gut()e_il
i am emptee in(out)id
eie aum f_owing no()thing
भरपूर ex(qu)ite_ent fa-cult-i रात को सोने नही देती
gut की रात को गोदी का सोना ही नही मिलता
एक सास से दो बच्चे नही संभलते
आधे अंदर ख़ाली फुरसत से जलते
आधा बाहर निकल पूरा मचलते
शोर गोदी में किसका आधा ढलते
मर्दो के चोचले पूरे नही चलते
खेले आंख मिचोली आधे-आधा
शाम के रंग न आधा घर मिलते
आधे ख़ाली अंदर फूल ख़ाली फलते
8888888888888888888888888888888888888888888
please support wiw o babi 0-1-0ness within lap of to()tal mother nature’s womb(gut)
दूसे की ज़ुबान को घर के अदर बिठायोगे
बद की शय को भरपूर ब()नामी से दोस्ती दरायोगे
राझा दर एक साझ को बाहर बतियायोगे
भरपूर दुनिया टिकी बद-नामी का नाम भरपूर पायोगे
बूंदियो की साँस का सारा महत्व होता है
ख़ाली 0 तत्व
एह लो बन गया कल का आज
भरपूर घर से बाहर निकालता है ज़ुबान को सास के दामाद की मौजूदगी के लिये
ज़ुबान भी इधर उधर देखे सहायता की दहन को लिये
दामाद के अंदर की भरपूर लीला को मिले भरपूर विरोध के गिले
अब सास क्या करे भरपूर दामाद की ज़ुबान जा जोड़े ज़िले
आधा भरपूर दामाद चखे-रखे और आधे मोड़े या ड़क्के
gut गोदी को अन-सुना करके देखना एह है की असुरो को कितना
ख़ाली भरना पड़ेगा बिना अन्य-दाज़ चखे
जिस युग में भगवान भी देख के ख़ाली रोआ है
_oor _ast 10s आखे अखे
अब भरपूर काअस्तित्व नही है ख़ाली अस्थि भी भरपूर देखे
तो भगवन का सहयोग भी नही होगा ख़ाली मौजूदगी का विरोध
इसी लिये भगवन भी गोदी के बाहर ढूंढे gut ब्रह्माण्ड की मौजूदगी का वियोग
कब तक बि(ल)खेगा gut ब्रह्माण्ड की चाल का ग्रहयोग
(पता है आधे को सोने नही दिया रा ने ख़ाली रात दर)
कल को आज
कल को आज
कल को आज
बस कर आधे
हाँजी बूँदा मईया
8888888888888888888888888888888888888888888
please support wiw o babi 0-1-0ness within lap of to()tal mother nature’s womb(gut)
_ut तो बीमा()रियों को भी न देखे
जात-पात दामाद के भरपूर लेखे
कल जो न ख़ाली हुये आज के भू-लेखे
ज़मीन पर उतरे सास ने भरपूर फेके
You must be logged in to post a comment.