सृष्टि गोदी की ख़ाली शांति तो किसी को भी भरपूर सीख नही देती
फिर भरपूर सास को तो जरूरत भी नही है किसी भी आधा जन्म मे
सृष्टि गोदी की ख़ाली शांति तो किसी को भी भरपूर सीख नही देती
फिर भरपूर सास को तो जरूरत भी नही है किसी भी आधा जन्म मे
तुमने क्या सोचा था विधा(वा)ता के लिखे हुये
भाग्य को अंदर ही ख़ाली मोड़ोगे
तुम तो आधा जन्म का उदय हुया
भरपूर अदर-बाहर बदलोगे
घर एक मन(का-भरपूर)दर होता है
जिसमे अदर का भरपूर वीर(य-ज)मान एक एक होता है
ਜਿੰਨੂ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰ ਦੀ ਸਮਝ ਨਾ ਹੋਵੇ
ਉਹ ਬਾਹਰ ਦਾ ਲਿਖਯਾ ਪੜਾਇਆ
ਅੱਧਾ ਜਨਮ ਈ ਅੱਖਾਂ ਮੀਤ ਜਾਵੇਗਾ
ਤੇ ਅੰਦਰ ਦਾ ਸਿਖਣ ਆਇਆ
ਅੰਦਰ ਨੀ ਅੱਖਾਂ ਲਬਦਾ ਲਿਆਯਾ
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जब सूर्य का आधा कण गोदी के अंदर आ जाए
तो क्या होगा
भरपूर गलेगा और ख़ाली घुलेगा
ख़ाली अनु का गोदी मे मान नही रखा
तो फिर आज भरपूर आन()धान की
सास अदर कैसे गलोगे
जब सास को अंदर मौत आती है तो
बाहर के शरीर को दफना या जला दिया आता है
जब भरपूर सास मर के अंदर ही ख़ाली जाग जाती है
उसके अंदर के भरपूर धढ़ अपने आप ही पूरे धढो को दफना देते है
या फिर ख़ाली अग्नि मे जल आते है
क्या हुआ
तुम-हरी सास मर-मार-मर के भी भरपूर भारी बीमा()री
यह क्या-क्यो लगा रखा है ऊची ऊची
अपवित्र असुरो ने अपने अदर ही भरपूर मदर
मनोरजन का अभाग्य निर-जन
शुरू करो दिन रात विसर-जन
अत ना भरे भरपूर दत-म()जन
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