जान डारो

दिन के अंदर भरपूर ज़ुबान को मही मौत मे म()कते

रात में भरपूर दिन को जैक-जात जाते जो जटते

सास के दामाद के धा(का)म भरपूर भूल-भुलाया भार भरते

जपने जय जाम जरपूर झाम जा ज()दर जाते जगते

इधर-उधर का भरपूर भ्याम ऊपर-निचे भूचा भिठाते

_urn बे-रहम

बेहमी दुनिया का एक एक गोदी की जंगलो को बेरहमी बाट बटा

अपना भरपूर घर बस()ने बसाने की लिये भरपूर भात भ()टा

उस भरपूर को अपने gut की ज़मीन पे रहम राही रुलता रटा

जाके जा जाये अदर सास का भरपूर दामाद दला दाता दरपूर दटा

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y-0-s in()id u _ol _lex इधर उधर k_ow-_ow a_out 0s in _il()ence

rit _aith _ill b_ing _it t_ing in()id
ri_ for_ard f_ont @ _it _ime

11 गुन

सास की एक यात्रा का भरपूर लेन देन
आधा जन्म अदर अ(प-शगुन)सफल मिलाये भरपूर चेन
ना खुले गाठो का स-गठन भरपूर भेन
ठोर ठगाये ठा ठाठे ठडर ठगी ठेन

0s in()id _ur_ace
_uking _out _ool _u_nace
इधर उधर mind_ul bo_row b_ace
car_y on _reaking _ol _ase

गाठ-गुनी

परपूर पैसा पा पड़ा लरपूर लालच लूरा लड़ा

अदर-बाहर खचाखच खरपूर खोपड़ी खा खड़ा

गाठो को गट मे डुबाये दौड़ती द()रजा दा दड़ा

साथ मे इधर उधर को बिठाये बैठ बाया बड़ा

दो(गाठो)गुनी तरक्की पाये सास सरपूर सड़ा

भरपूर ब()बाद बू बरात

बाहर कलयुग का क्या हो यह तो सास के दामाद की

आखो को भरपूर भरा (इधर-उधर) भिखेगा

और gut के अदर का भरपूर कलयुग का काम-जाम

अदर ही गर()पूर गायेगा गाठो गा गमगीन गान

बाहर के अंदर