तुम क्या इतने ही भु()क्कड़ हो की गम को पता ही नही
वसोइ वी वस्तु अदर है या शौचा-लू मे जडी जही
तुमहारे घर घ असूल है
दूयियादारी दबल दबूल है
वस्तु वास वडापन वसूल है
क्यो क-वारी कबूल है
तुम क्या इतने ही भु()क्कड़ हो की गम को पता ही नही
वसोइ वी वस्तु अदर है या शौचा-लू मे जडी जही
तुमहारे घर घ असूल है
दूयियादारी दबल दबूल है
वस्तु वास वडापन वसूल है
क्यो क-वारी कबूल है
तरपूर तूतू मै मै यमायी ये यारियो ये बीमे बारो
और बीमा(या)रियो बे बरपूर बन()दर बूटायो
इलाज महु()त माली महगा मालूम मा
अब आया अत-रिक्श शय्या शा
आधा जन्म ज(ली)ही झुका झा
कितना करपूर काया का
ri_ 1s _ar _ol _rong()ing in()id ho_ _it
तूतू मै मै भ 1/2 भायी
अंदर की खाली देवी की गुफा की इज़्ज़त लूटता
और बाहर बहनो के समा(दा)ज की रक्षा के धागेधार धहाडता
u _ar _ur_oun_ed y छाया
0 t_ink no a_one माया
किसका किया कदर काया
भूल भुलयीया भय भाया
_out of ca_ to _ol 1 _an
ज़ुबान जय मरद मज़्ज़त मिया मजाज मोती
अरे किसे नगा नर निया नाम न्योति
जुबान जग जुडा जाघ ज्योति
तूतू मै मै तरा-जू तुयिया तोती
देवी का घर नहीं होता
तो लूटते तहो तोता
और जाडो जहा जोता
घर ले अदर देवी नहीं आती
घर के अदर तो श्री ल(क्ष)जी समाती
घर की रसोई मे मर-दान-गी झाडने झी झजा
खून की रगो मे आधा जन्म का करपूर कजा
मर-द मुडे सामने इधर उधर न्योता नजा
और पीछे खलोता खुजला खजा
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mi_dfu_l_ess bo* s_apping
w_o _ill s_e th@ out
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जब तुम-हारो को घर के अदर कोई नही देखता
तो कान बाहर किस किस की लकीरे खीचता
तुम तो अपने अदर नही पडते पर पर पर
और बाहर भरपूर भूलाते आ अदर मर मर मर
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