जा जा जा

अच्छी आदतों का बटता है फलूदा भरपूर दुनिया में


आदतो की दगी न बनने दे भरपूर को जादू की अंदर झड़ी


जागी जाग जगाये जा


जाग जाये जो जुबान


जागो जी जड़ी न झड़ी अदर जगि जान


जागो के जाड़ की जति


जोड़ जी जाने झर-पूर जोड़ी

-की

प्रतिमा और अफसर कौन से भरपूर के पास सामान भरपूर है


तभी तो इतने अफसर खो दिये एक जन्म में


भरपूर की मन जिल चा()की है


इरादो की तकरी झाकी है


मुठी भर ज़मीन ला की है


तोलना सामान क्या बाकी है

शय

भरपूर से बड़ा नहीं कोई शौ-चाल()य को भय


बीमा या रियो से बढ़कर नहीं कोई शय


सास के दामाद जैसा परीक्षक भरपूर शक का शरय

लुटा शक लोटाये भरपूर शय का भय

विश-वास

सास का विश(का)वास करता है भरपूर का पूरा नास


जरूरते कामयाब नसीब भरपूर नकाब

चेहरे भूले रास्ता अदर न मिले रुकाव

खिल खिल खेलता रहे भरपूर झुकाव

i-m-p(oora)

i-m-()art-ing g(ut)odi

सास को फे()हमी बहुत है


अदर की दामाद की-ती गलफियो की


ज़िन्दगी नहीं हारे अभी तक है बाकी दगी


जो भरपूर सर के आगे न रूकती ठगी


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