_urg में रुका(कर)वटे डालने से
भरपूर को साधना _ut मिलेगे
मुखोटे भी _tile से खिलेगे
आँखों को भुलाये भरपूर ज़िले रगेगे
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भरपूर को साधना _ut मिलेगे
मुखोटे भी _tile से खिलेगे
आँखों को भुलाये भरपूर ज़िले रगेगे
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भरपूर _orr-y
ਬਿਨਾ _noc_ ਕੀਤੇ ਈ
ਅਗ ਅੰਗ c ਰੇਜੀ ਚੜੇ ਹੋਏ ਆ
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th@ ()old _oor
अच्छी आदतों का बटता है फलूदा भरपूर दुनिया में
आदतो की दगी न बनने दे भरपूर को जादू की अंदर झड़ी
जागी जाग जगाये जा
जाग जाये जो जुबान
जागो जी जड़ी न झड़ी अदर जगि जान
जागो के जाड़ की जति
जोड़ जी जाने झर-पूर जोड़ी
किस-मत भरपूर मेहरबान
लाये दगी के अदर मे()मान
जी चाहिये अदर मेरी मान
लूटी लूटी है आखो की आन
फूटी आन फोट जाये ध्यान
प्रतिमा और अफसर कौन से भरपूर के पास सामान भरपूर है
तभी तो इतने अफसर खो दिये एक जन्म में
भरपूर की मन जिल चा()की है
इरादो की तकरी झाकी है
मुठी भर ज़मीन ला की है
तोलना सामान क्या बाकी है
भरपूर से बड़ा नहीं कोई शौ-चाल()य को भय
बीमा या रियो से बढ़कर नहीं कोई शय
सास के दामाद जैसा परीक्षक भरपूर शक का शरय
लुटा शक लोटाये भरपूर शय का भय
सास का विश(का)वास करता है भरपूर का पूरा नास
जरूरते कामयाब नसीब भरपूर नकाब
चेहरे भूले रास्ता अदर न मिले रुकाव
खिल खिल खेलता रहे भरपूर झुकाव
i-m-()art-ing g(ut)odi
सास को फे()हमी बहुत है
अदर की दामाद की-ती गलफियो की
ज़िन्दगी नहीं हारे अभी तक है बाकी दगी
जो भरपूर सर के आगे न रूकती ठगी
y _ame _if a()m
तुम्हारी तूतू में में क्या
gut गोदी की me-()ea से पैदा होइ है
जो तुम-हारे _-it-ti के शरीर
गोदी की मिट्टी में ही मिल जायेंगे
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