कौन सा मायी का लाल सुलाये अंदर काली
भूल जायेगा रात की भरपूर वाली दिवाली
न मिले ख़याली न धौला हिम्मत सवाली
कौन सा मायी का लाल सुलाये अंदर काली
भूल जायेगा रात की भरपूर वाली दिवाली
न मिले ख़याली न धौला हिम्मत सवाली
असुरो को मा-बाप कहते भरपूर शर्म नहीं
आती जो खुद के आधे बच्चे का गला
घोट के आधा that which is pa_t one
_eep _ive एक ऊंचाई के लिए रखते है
भरपूर को पेरो पे खड़े होना है
(क्यों खड़े होना है जब आधे
बच्चे तो गोदी में बैठे रहते है)
गोदी का अन्न खाने से बीमारिया लगती है
और बीमारिया का सफाया
करने के लिए भरपूर तल की कमाई चहिये
आधे बच्चो को पालने के लिए
भरपूर कमाई चाहिए
अब भरपूर तो घर लोट(ता)ा नही
तो इसका बल मत ईंटे भी पक्की
साथ ही पलटी है
कच्ची अलग
y in()id u @_ar
भरपूर _had_ow_
असुरो से पूछो भरपूर क्या होता है
i _av nothing
i am nothing
ever-y-thing in()id
_not thin_
we_k da_s का e_d भी
we_k ही होता है न
तभी तो इतना सौत
गोदी के दिन के अंदर
_oaning भरपूर in()id _ase
gut ब्रह्माण्ड का शोर तो
असुरो के कान पक चुके है
भरपूर निकम्मो को घर के अदर जागह
नही मिलती और gut गोदी में ढूंढते है
किसे
तूतू में में की दुनिया में तो एक की
उंछायी को भरपूर सम्मान
गिल्टा है
a gut nature godi’ obje_t _ive
to()tal ()espect to y in()id u
_ang an o_ject for y f_ee _ill
_hoice is _not an o_tion for
godi’ a_fection of o_ject
—-
an emptee being nothing
neither aiding
ch()ices or cha()s
_la bla t-each()ings sae
this or that
has gut alone mother nature
_old u to s_out bharpoor _oud
in()id gut nature godi’ emptee
si_ence wai()ing for
y in()id u
hi_hest _peak
wit()in eie thi_k
a bharpoor is _ur_uring
a-l1 in()id th@ which is _out
h()ard one _outh
एक सास को सोना भरपूर नसीब नहीं मिलता
इसी लिए दिन में भी भरपूर सास-रात
को भुला के भटके की रात का झटका
अदर एक एक को देता है
आधे को भरपूर से सीधी all-er_y है
इसी लिए आधा पास में फाटक नहीं बनाता
_ail को तो उड़ना ही है
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