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Category: gut-veda
श्रम शाम
गोदी का to()tal आश्रम
सांसो का सारा परिश्रम
जिसके पास पा पही प()म
वोह है दुनिया अदर एक भ्रम
ख़ाली ख़ाली
ख़ाली मईआ दिन-रात ज़मीन आसमान ख़ाली रखती
ताकि ख़ाली बच्चे स्माधि में सुरो संग ख़ाली खो खारती
अञ्जन
कलश कराना काढ़े कण कण
अंदर आए जननि जन जन
ध्यान में मगन ख़ाली खन खन
घुले सांसे घोल अंदर अञ्जन घन घन
कुल gut
कुल देवी की ख़ाली कोख() शक्ति विजई भव:
ख़ाली गुरु
शुन्या _ut का गुरु गोदी मईया के सिवाए
दुनिया के कौन से gut मे पैदा होगा
ख़ाली सांसो का सरूर सारा फिराए
ख़ाली सांसे
सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में
आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे
अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे
इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे
टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे
ख़ाली आन
सृष्टि मईया की गोदी अंदर आधे
ख़ाली महा(अनु-आन)बारक
राया
मईया ने हाथ बांधे बरखाया
माखन इधर उधर गुर्राया
साँस की तरेडों तो ताली
तिल्ली ताया तर्राया
आधे सफ़ेद सच्चे ()साल
गोदी के काल्कि को है ना इंतज़ार
सृष्टि की कोख का ख़ाली खल कख-वार
तुम-हारे अदर भरपूर त्रिकाल का अंत-कार
ना लौटाए अंदर तरपूर तरो ताली ताल तार
नही आया य-कीन भरपूर भहाली बे-हाल ब-हार

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