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कम से कम या ज्यादा से ज्यादा

असुर कर ही क्या सकते है

शक्ति का ड्रिप-योग भीतर

अभी हुआ है ज-वान

आज के योग में

भू के धोखे

बूंदिया तो भूखी नहीं है

असुरो की कम-आयी की

पर यह तो काली माता के

अंदर के भू के धोखे है

सारे ही रूखे हे

इज़्ज़त के खोखे है

धज्जिया निकलती झरोखे है

अरे हाँ धज्जिया कैसे उड़ती है

इधर उधर की hol मर्जिया भर्ती होती है न

फिर कहते है जी दिल तो तलवे का बचा है जी

असुरो की शर्म की कमी मैं ऊंचाई का बढ़ावा हो रहा है

काली माता से मुँह छुपाते फिरते है


ऐसा तो सपने में भी नहीं सोचा था


यह तो जो हे नहीं सकता


gut गोदी के अंदर