an un()di()tional a_ur ge_m
w_nt भरपूर con_itions
भरपूर नाली के गदे कीड़े पड़े पड़े न
गढ़े दामाद अदर गले जुड़े
an un()di()tional a_ur ge_m
w_nt भरपूर con_itions
भरपूर नाली के गदे कीड़े पड़े पड़े न
गढ़े दामाद अदर गले जुड़े
ख़ाली भगवन सब भरपूरो को देख रहा है
असुरो ने भगवन को भी वेहला बिठा रखा है
भगवन के पास समय नहीं है ख़ाली
सूखी गोदी को देखने का
y _od is half in()id
& half out()id
ju_t _ik भरपूर
सास का दामाद
y in()id u f_ee _ill
vs
gut nature godi’ _till
4 _eep _ill em_tee _ill
& u re_ain full_ess
re()ill
a भरपूर _hip is _afe in on _arb()
_ut_ th@ _hi()ch is pa_t not 1
un()oing in()id भरपूर _rip
दिन में कौन किसको b_ack_i_t
नज़रो का _a_k आता है
रात में मुखोटे असली खोते नहीं
सौत को धोते
are u all _earing s_me
fa()ces in()id
so th@ _hich is pa_t is
on un-i-form
& in(out)id y norm
भरपूर _ood भरपूर sto()m
सास का दामाद हर दिन भरपूर
हैरान रहती है क()मो की रात की
भरपूर बारिश सूखे ही रहन्दे
एक एक की खारिश तभी तो
बनेगा दिन का भरपूर
एक गुजारिश
अंत में नयी शुरुआत होती है एक की
अ()गला आधा जन्म
गले में उतरा भरपूर खराश
खुश हो जायो भरपूर शा()बाश
a _ound is a p_ace _here
भरपूर ne_er en_er
_eep reci()cling भरपूर
a()ound hol
आज को अंदर गोदी का अच्छा-बुरा
सारा पता है ख़ाली बूंदिया ख़ाली
घरो में कुसकती नहीं है और
सास के दामाद को मर्द की ईंट मारनी है
अपने घर को अदर बाहर ढलते
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