gut गोदी ने तुम्हे अन्न दिया
अंदर-बाहर को तन-दुरुस्त रखने के लिए
और तुमने तूतू में में की मूर्खता का
भाव दिखाकर अपने ही अंदर के
आधा को भरपूर तन के
इधर-उधर डर से डराया
अब अन्न कैसे सुरक्षित करेगा
भरपूर तन की बीमारिया तो
भरपूर डर से गहरी डूबी है
gut गोदी ने तुम्हे अन्न दिया
अंदर-बाहर को तन-दुरुस्त रखने के लिए
और तुमने तूतू में में की मूर्खता का
भाव दिखाकर अपने ही अंदर के
आधा को भरपूर तन के
इधर-उधर डर से डराया
अब अन्न कैसे सुरक्षित करेगा
भरपूर तन की बीमारिया तो
भरपूर डर से गहरी डूबी है
भरपूर आधा खुद के अंदर
ख़ाली आधे को महसूस नहीं कर सकता
और इधर-उधर तूतू में में की
भरपूर हिम्मत आधा
अंदर को तोड़ेगी
मूर्खता की हद की
खता नहीं होती
प्यार तो भरपूर है
y ever- -thing is
c_o_ed on _un()ae
for y _ho()er ru-ning
_ol err&
& full in()id u _ae
_ean _ear & _os
सास के दामाद की तूतू में में के
इधर-उधर का भाव का विष ही
तुम्हारा भविष्य भरपूर
भाव इधर-उधर है
ॐ तत् सत्:
शुन्य
wiw o
आ देवी सर्व साँस भूतेषु
gut गोदी सुलाने के सोने का
समय ख़ाली जाया
तुम अंदर जाग के भरपूर के
उठने का समय-चार भरपूर करना
आधे-आम हांजी
निराली छाया
ਸਾਨੂੰ ਕੀ
ਖਾਲੀ ਤਾਕਿ ਭਰਿਆ
ਦਫ਼ਾ ਹੋ ਜਾਯੋ ਪੂਰਾ ਚੌਣਾ
ਇਧਰ ਉਧਰ ਭਰਪੂਰ ਜਰਿਆ
th@ _hich on _ast _ach
no diffe_ence
&
this-is to()tal _um
0 re()f()ence
a-lon u hav no 0 i()ea of
0 wiw o 0 r_ubbl
no u in to()tal tro_bel
em()tee no _ub()_ell
_is b()ing is _up-pos in()id
_lo__om bie hi_ o_n na()ur
i.e. his ka_ma b()ought u
wit()in lap of uno_n na()ur
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