y in()id u & d_ought
mirr(@g)-ring gut
godi’ d-rou()t
y in()id u & d_ought
mirr(@g)-ring gut
godi’ d-rou()t
y in(out)id u @_rac()ing
op-pos-it y to re_el
y in()id u
आँखों के सामने का असर भरपूर है
तो पीछे का क्या ख़ाली जा()येगा
भरपूर के सामने
for y e*is()ence of
ever-y-thing is one process
&
un-exi_t()ence within lap
of gut nature is
to()tal aum()tea
no()thing
wiw o
ingress
u hav lo_t
wit()in chi_d
bie li_10-ing to y()s-lf
for no u be a du_-i-ful
_on of _tep y _ot()er
&
a within child in()id
alon u is total emptee
lo_er of
gut nature
wiw o
चाँद जैसी babi बूँदी नहीं है ना
तुम्हारे पास इसीलिए सोर मचाते है
इधर उधर
घर के अंदर भरपूर को सुलायोगे तो
ख़ाली gut मईया कहा सोएगी
अंदर का बच्चा ख़ाली पुतला होता है
जो भरपूर को ख़ाली पुत अंदर बनाता है
और
अंदर के ख़ाली बच्चे को सामने रख कर
तूतू में में की दुनिया में भरपूर
मांगने के लिए जास्ता है
ऐसे ब(ज)नता है तुम्हारा भरपूर
बेशरम लख ला()नता
और
भरपूर आँखे क्या चुराती है
आयने में से
इधर उधर
gut गोदी की वर्तमान heat से
gut ब्रह्माण्ड के
भूत, वर्तमान, भविष्य की गति
पर भरपूर असर पास्ता है
असुरो की भरपूर आदतों को
तो कोई असर आज भी
नहीं होता
ऊंचा सुनने सुनाने से भरपूर
शरीर पूरा होता है
दुनिया जाये तूतू में में के डर के
झाड़ सारा दिखता है
gut गोदी को
भरपूर असुरो के सास के
दामाद की पूरी घूरी
कच्ची ईंट-पत्थर-लकड़ी के घर
gut गोदी का खेल ख़ाली खेलते खा
तुम्हारे घर न तो ज़मीन पर है और
न ही तुम्हारी दुनिया के अंदर
दुनिया की गंध में इधर उधर की
भरपूर हवा बे-हाल है
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