बांट-वार मर-दो

gut गोदी को मर्दो की जात दिखाते है

अंदर के आम को बांट-वार खाते है

सीता के अपहरण को भीतर बिठाते है

पात इधर-उधर पते की पूरी

पास पतियाते है

s_oot-ly

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तुम न तो जीते जो और न ही मरते मो

बस क्यों ज़िदा तो मर()म भी बे-मौत बिदा

य-कीन

भरपूर को अपने अदर के असुर

होने का यकीन घर के बहार के

असुर से मिल कर तो हो ही

आता है न अंदर

का यकीन क्यों

नहीं बाहर मिलता