मि(र)ची

घर की नज़र के बाहर तो भरपूर

मि()ची टाग राखी है

कान के छेद में क्यों नहीं डालते

आंखे तो बचाया ही लायेगी

कानो के छेद के अंदर

भरपूर भय के लिये

आ-स

तुछ मानस

मान सास फिर उपवास

तेरा दिखावा भरपूर वास

मा को लेके नस/नस का दास

गोदी के बाहर भरपूर जायेगा बिना त्रास