दिन में सोते भरपूर असुरो की रात की भरपूर वाता का जगाता का जगराता दिन ही हुया
अधेरे से आखे लदाते है अदर के दिन-रात की
तो फिर रात कब हया
दिन में सोते भरपूर असुरो की रात की भरपूर वाता का जगाता का जगराता दिन ही हुया
अधेरे से आखे लदाते है अदर के दिन-रात की
तो फिर रात कब हया
_h@ _ill adha do
wit()out
adhe breathing
d-i-d wit()in
emptee()ead adha
a()lon
t_ain _ot
_itt_e in()id
_ate
घर की नज़र के बाहर तो भरपूर
मि()ची टाग राखी है
कान के छेद में क्यों नहीं डालते
आंखे तो बचाया ही लायेगी
कानो के छेद के अंदर
भरपूर भय के लिये
भरपूर ईंट का जवा(न)ब
म-रद ही देगा इम्तिहान
दौड़े इधर उधर भरपूर मचान
किसका आया है फरमान
मौत न देखे सर का भरपूर सामान
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तुछ मानस
मान सास फिर उपवास
तेरा दिखावा भरपूर वास
मा को लेके नस/नस का दास
गोदी के बाहर भरपूर जायेगा बिना त्रास
कलयुग के या()त्रियों को
आधा जन्म के भरपूर दिन-रात
अंदर बीमा(या)रियो की
शुभ-काम-न-आये()
भू-का प्यासा आधे कितना भरपूर भैभीत है तूतू में में की दुनिया की तूतू से
gut गोदी के ख़ाली शेर से कहो पूरा li-on
y in()id u do hav 2 *_ress gra-y-ti(mul-ti)tud of y in__tion
in-su_icient use of po_ent- lo-ti-on
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