असुरो के भरपूर रहन-सहन का भरपूर ढंग
गोदी की ख़ाली नि()मो की उलंघना में
भरपूर _su()nam-i को ला()ता है
असुरो के भरपूर रहन-सहन का भरपूर ढंग
गोदी की ख़ाली नि()मो की उलंघना में
भरपूर _su()nam-i को ला()ता है
l-if is f-un
जिन-दगी मज़ाक है
one pound _ood
one bound _ad
y que_tion u getting an()er
y s’ood _ask
y con()nu
_i()st _ill
v-er-if-y
it is u
_er()ect c_on
it _ay pro_eed
_ll spec()es o-n this plan-et
_no _ow to giv b_r-th
& pro()ect _oung bab()ie
asur wit()in y in()id
u()eing is a not spec-ies
_h@ ben()fit ever- -da-y lif
y in()id u
y p()act-i-cal
y _ea()10 pat()
आधे तो gut की tot-al माँ(की)मूली है
इसी लिए गोदी की आग ख़ाली बबुली है
अंदर बाहर बोले ख़ाली आधे तो-तुली है
भीतर न समझे ख़ाली भू ति-तली है
आखे दिखाओगे तो ख़ाली की
भरपूर बिजली है
सफायी पसंद भरपूर को अदर के
सास के दामाद की गन्दगी की गन-दगी
की खुशबू दाग बाटती और दगी
फैलाती भरपूर साफ़ है
आज तो भरपूर घर की चकमक की
मक को क्यो कहन्दे
a dis_la-y of pro()ecting
on wor_d _ill come 2
_aunt-2-_it in()id u
–
y un()n-ow-n
w’ood this _ill ach y in()id
u t_ans()orm a-lon
_ill_on affec()ed
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भरपूर से अपना भार ढो नहीं होता
और गोदी की चिंटी को दाना उठाते
देख कर प्रेरणा मिलती है
एह कौन बातयेगा चींटी की टांगे
gut गोदी का ख़ाली घर-भार उठा
के संभलके के चलती है
भरपूर को तो यह भी नहीं पास्ता
यह क्यो अदर क्या है, ढोने से पहले
इकठा करना जरूरी है
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