तूतू में में की दुनिया में भरपूर कम(आ)यी
की कीमत पूरी नहीं सारी है से
बीमा-यारिया साफ होती है के गहरी
होने से भरपूर यात्रियों के दुख सुख में
भरपूर शामिल रहता है सब को
एक बना के रखता है
तूतू में में की दुनिया में भरपूर कम(आ)यी
की कीमत पूरी नहीं सारी है से
बीमा-यारिया साफ होती है के गहरी
होने से भरपूर यात्रियों के दुख सुख में
भरपूर शामिल रहता है सब को
एक बना के रखता है
gut मईआ ने आंखे बंद किते ही
सास को पल-पोस
के बड़ा कर दिया और सास की
आखे तो खुली ही रहेगी आधा जन्म
की उंचाईया की गिरावट मापने के लिये
फिर बड़ा को ख़ाली कौन करेगा
तेरा भरपूर ख्वाब
पभी पूरा पो पाया पय
तुम-हारे आधा जन्म के भरपूर अदर
की मौत तो भरपूर पैदा होने से पहले ही
तय है नहीं भरेगा आज का भय
ख़ाली तैरेगा गोदी के
अंदर ख़ाली लेय
a hi_hest full_ess _eak of
one in()id kal–uga,
a str8 _all to_ard
em_tee _ual
_round
un()on u-ga
an em_tee
_ual _word is
to()tal _harp
pro()e_cting wit()in
_ap of gut nature
to()tal wiw o
_arp
gut nature ने भरपूर के रास्तो में
भारी मुश्किलें खड़ी करदी है इसी लिये
gut गोदी में भारी भरपूर मुश्किलो
का आमना-सामना सामने
सड़ सहा से
तूतू में में की दुनिया तो भरपूर
दुरभाग्य की बदौलत ही
पूरी बद की दौलत है
gut गोदी में ऐसी दो-लत ख़ाली है
for u _an nei()er i()nore
n-or _un-ish bharpoor be()or
th@ _ook in()id un-o()n _oor
हर सास वोह ज़हर है जो जरूरत से
ज्यादा या कम अदर
भरपूर है
रात को दिन बना रखा है और दिन मे ही बाहर निकलते है न
भरपूर दुनिया भी निकलेगी ब्रह्माण्ड की रात के अंदर
१-१ कलयुग मे ऐसा एक कही कई बार-बार को लेके आता है
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