असुरो की बैठी हुई सेना तो
भरपूर बहु-तो ने देखी होगी
आनद ने भी भरपूर आखे
खोली भोगी
असुरो की बैठी हुई सेना तो
भरपूर बहु-तो ने देखी होगी
आनद ने भी भरपूर आखे
खोली भोगी
y abs()nce g()ow s()ong-er
for भरपूर to _eep f_lling
for भरपूर _@_@
भरपूर मे()मान के बहाने भरपूर को भी
भरपूर खाने को मिलेगा नहीं तो
रोज रोज नहीं मिलता येसा भरपूर
समा आयने भी भरपूर बटोरता
बा भरपूर काम के आयने
कैद करके काडे करडे काटते
बिंदी खड़ी करने की लात नहीं मारनी
आती सास को और पेरो पे खडे
होने की खडी बाते बनाते बा
खडिया बुनने से भी बैठा
बा बकटा बा
y in()id u _lae is an emptee
com_on()n’t of self-car for
y in()id u need to s_op
sp()eading full_ess
within _ap of nature
a 9 sti()ches c()aving 9 time
for 9 is absolu()e
no()thing 9ime
सूखे पड़े हुए गोदी के भुयें
भरपूर घर भूखे भाड़े भय मुये
न मिले यानि तो घूरे ग्यानि
न उतरे अंदर सीखा सूखा
सा सयानी
a भरपूर cre_ation is y on s_or()y
to end within lap of nature
no()thing to()tal _or()y
sim(pal)ba
जितने मू उतनी जू-बाते
काग काया कालक न ख़ाली राते
चा()दनी की भरपूर बरसाते
आयना न देखे मुखोटे भरपूर सजते
भूले भले न ख़ाली रहते अंदर रखते
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