सफ़े()द

सफ़ेद भाग्य की रौशनी से कर्मो की भरपूर आदतो की सफेदी भी

रौशनी से सफ़ेद हो जाती है

पर एह क्या

दिन मे निकलते ही काली हो गयी

तू-तू

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एक सास की दामाद की दुनिया के लोग

तुम-हारे अंदर का पानी क्यों

सुला सले से

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