उठा

नंगे हो के गोदी का पत्थर उठाओगे


तो पत्थर भी शर्मा के बैठा जायेगा

असुरो की शर्म मैं उचाई की कमी हो रही है

इज़्ज़त

क्या तूतू मैं मैं की इज़्ज़त

gut गोदी के अंदर की

ख़ाली मईया से भी

ऊँची होती है

इसी लिए भोगी को वास की जरूरत होती है

सास दिन रात रोगी होती है

रो रो कर भी उड़ती रहती है

उड़ने का भोग भी संजोगी होती है