अलख निरंजण
सृष्टि गोदी का अन्न-जण निराकार
भिक्षां देहि भिक्षां देहि भिक्षां देहि
हे अन्नपूर्णा देवी
आधे को गोदी नंदन के लिए
गोदी उद्धार आदान कीजिए
अलख निरंजण
सृष्टि गोदी का अन्न-जण निराकार
भिक्षां देहि भिक्षां देहि भिक्षां देहि
हे अन्नपूर्णा देवी
आधे को गोदी नंदन के लिए
गोदी उद्धार आदान कीजिए
o_m
केवल्य आधे
ॐ(काल) आधे
शून्य आधे
आधे केवल्य
के समाने
आधा आमने आना
eie aum
an aum()tea b_ainee boo_er
re()urning tim()lee tum()
for ys-lf ha_d(c_aft)ly hum()
_et’ p_ae a ma_ch mo mu_mur
i do u _av _aring cu (_urn) _ur
देवी के आधे की गुफा की धूल मिट्टी का कण कण
चाफ चौंकती ची चीवारे चुन चुन
गले में गोदी गी घड़िआल की घण्टी नहीं बांधते
ताकि गोदी की साँस सी आँख खुले पता पा पलटे
आत्मज्ञान की हत्या से मुक्ति की आँख नही खुलती
is th@ co_ing f_om deep wi-thin

1 _all _lit_ers 0 un()old
मोक्ष मिले माली मल मनदर
साँसे सिले सालो स्याल सुन्दर
for di_ine to _lae
_ook in/out em_tee rae
_ear_ae 0 s_ae
w_o is em_tee h_e
foo_ is tot-al f_e
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