देवी के ख़ाली बच्चो का आघात
दुनिया में लाया भरपूर सौ-गात
एक घर के अंदर भरपूर जात
सोने पे सुहागा दिन-रात भरपूर बात
देवी के ख़ाली बच्चो का आघात
दुनिया में लाया भरपूर सौ-गात
एक घर के अंदर भरपूर जात
सोने पे सुहागा दिन-रात भरपूर बात
is plan_et earth a भरपूर wor_d
gut कहा घूमता है ब्रह्माण्ड में
डूबती है तो तूतू में में की
भरपूर दुनिया
भरी जिसने अपने अंदर
घर की निया
a _rim in()id hom is _orry
2 go in pri_ar()y _ill _ring
_ack pri()_ary
कर्मो पे भरपूर का रग छड़ सकता है
तभी तो दामाद गहरा होता है
सास के अदर
गोदी को भरपूर पिछवाड़ा दिखा
के आखो के सामने को
भरपूर फक्र होता है
आधा जन्म की बिदाई के लिये
त्यार है सब कैसा
दिखेगा भरपूर लुटा अन्न
gut गोदी के अंदर
कहते है हर मुश्किल का हल
बीच में ही होता है
भरपूर बीमा(या)रियो का हल
करेगा gut गोदी की भरपूर खेती का
ख़ाली बल
ever-y-thing on wor_d
exi_tence is _ol on()ess
man-y in()id gut _ur()ace()all
_ow
y in()id u @er _not no adhe
आखे भी थर थर्रायेगी उठे न
भरपूर भाड़े के अदर बाधे
You must be logged in to post a comment.