फिक्र को धुये मे उड़ा दिया
सबक भी न पड़ा भरपूर भहा भया
अदर ही ढूढे भरपूर जि-कर का जिया
फीका फडा फाड फे फुरा
आखे हाय खड़े खो क्या करोगे पिया
फिक्र को धुये मे उड़ा दिया
सबक भी न पड़ा भरपूर भहा भया
अदर ही ढूढे भरपूर जि-कर का जिया
फीका फडा फाड फे फुरा
आखे हाय खड़े खो क्या करोगे पिया