ख़ाली आत्मज्ञान साँस के भीतर से सृष्टि गोदी के अंदर ही ख़ाली समाता है
बाहर की दुनिया का सीखा सास के अदर को भरपूर अपवित्र मे-ला ही भाता है
ख़ाली आत्मज्ञान साँस के भीतर से सृष्टि गोदी के अंदर ही ख़ाली समाता है
बाहर की दुनिया का सीखा सास के अदर को भरपूर अपवित्र मे-ला ही भाता है