(अ-श)कल

अक्ल क्या घास चरने गयी है


तू तू मे मे की शकल गोदी मे आती गाय है जिसे दुनिया का एक एक छू नही सकता


यह इज़्ज़त मिलती है गोदी को घरो के अदर


ज़ुबान की शकल दामाद से मैच करती है


मूह फेर भरने के हेर है

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment