अक्ल क्या घास चरने गयी है
तू तू मे मे की शकल गोदी मे आती गाय है जिसे दुनिया का एक एक छू नही सकता
यह इज़्ज़त मिलती है गोदी को घरो के अदर
ज़ुबान की शकल दामाद से मैच करती है
मूह फेर भरने के हेर है
अक्ल क्या घास चरने गयी है
तू तू मे मे की शकल गोदी मे आती गाय है जिसे दुनिया का एक एक छू नही सकता
यह इज़्ज़त मिलती है गोदी को घरो के अदर
ज़ुबान की शकल दामाद से मैच करती है
मूह फेर भरने के हेर है