अब यह क्या
फिर से वही
सास ससुर के भरपूर जुयो की राते
लुटेगी अदर भरपूर सौगाते
चोरी छुपे भरपूर मुकालाते
न निकले मूह से बाहरपुर फर(ारे) माते
अब यह क्या
फिर से वही
सास ससुर के भरपूर जुयो की राते
लुटेगी अदर भरपूर सौगाते
चोरी छुपे भरपूर मुकालाते
न निकले मूह से बाहरपुर फर(ारे) माते