सफ़ेद भाग्य की रौशनी से कर्मो की भरपूर आदतो की सफेदी भी
रौशनी से सफ़ेद हो जाती है
पर एह क्या
दिन मे निकलते ही काली हो गयी
तू-तू
सफ़ेद भाग्य की रौशनी से कर्मो की भरपूर आदतो की सफेदी भी
रौशनी से सफ़ेद हो जाती है
पर एह क्या
दिन मे निकलते ही काली हो गयी
तू-तू