रात को दिन बना रखा है और दिन मे ही बाहर निकलते है न
भरपूर दुनिया भी निकलेगी ब्रह्माण्ड की रात के अंदर
१-१ कलयुग मे ऐसा एक कही कई बार-बार को लेके आता है
रात को दिन बना रखा है और दिन मे ही बाहर निकलते है न
भरपूर दुनिया भी निकलेगी ब्रह्माण्ड की रात के अंदर
१-१ कलयुग मे ऐसा एक कही कई बार-बार को लेके आता है