भरपूर जुबान भरपूर दीवान
चारो दिशाए अंदर परेशान
बुंदिया भी न दिखाए ख़ाली मचान
ख़ाली होगा कब भरपूर का तब शमशान
नाज़ भी अंजान न जाने भरपूर तूफ़ान
भरपूर जुबान भरपूर दीवान
चारो दिशाए अंदर परेशान
बुंदिया भी न दिखाए ख़ाली मचान
ख़ाली होगा कब भरपूर का तब शमशान
नाज़ भी अंजान न जाने भरपूर तूफ़ान