भरपूर के असली सोने के ढोने का
समाया तो अब है जाया
आखे भी न छुये ऐसा छख छहाया
इधर उधर ताके लेखा खुद लिखवाया
दिन दूर ढले ढाल को अंदर गिराया
अदर के बस में नही भरपूर किराया
अब क्या करेगा भरपूर है पूरा पाया
असली सोना तो अब गोदी का दिन भी देखेगा
भरपूर जब अंदर ही नीद का वास गवाया
राते लूटी घर का जेब का कतरा घर के
अदर ही सास काते कत कत कमाया
