जुबान से ख़ाली अखर तो
निकले नहीं निकलते
(घर से निकलते ही कुछ दूर चलते
ही गोदी में है ख़ाली धर)
और अब भरी जुबान को बन्दी
बना के आखो के सामने रख दिया है
कौन सी बन्दि है येह
दायी कि बायी
जुबान से ख़ाली अखर तो
निकले नहीं निकलते
(घर से निकलते ही कुछ दूर चलते
ही गोदी में है ख़ाली धर)
और अब भरी जुबान को बन्दी
बना के आखो के सामने रख दिया है
कौन सी बन्दि है येह
दायी कि बायी