सपनो की फिक्र

अपने सपनी से ज्यादा अपनो के भरपूर सपनो की फिक्र रहती है


भरपूर का फायदा तो पूरा ही होना चाहिये


मार धाड़ के सपने तो सब के एक है


मुझे आगे बड़ना है


अब यह भी ले लो


भरपूर न तो पिछे हटता है और

न ही आगे निकल नाता है


यह तो बीच में हे कही अटका हुआ है


मद मद का अकल है

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Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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