स-पनो के अंदर भरपूर पसीना नहीं बहाता
सीना भी तो सेना को एक प से मिलाता
तभी दिन भी सपना बन कर निकल जाता
भरपूर फल मन-तर मुग्ध देखे मस्य का मल निकल जाता
स-पनो के अंदर भरपूर पसीना नहीं बहाता
सीना भी तो सेना को एक प से मिलाता
तभी दिन भी सपना बन कर निकल जाता
भरपूर फल मन-तर मुग्ध देखे मस्य का मल निकल जाता