निकल गया

स-पनो के अंदर भरपूर पसीना नहीं बहाता


सीना भी तो सेना को एक प से मिलाता


तभी दिन भी सपना बन कर निकल जाता


भरपूर फल मन-तर मुग्ध देखे मस्य का मल निकल जाता

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment