ख़ाली जाम

आज तो बिजली चमकेगी


चकमक चकमक चाव चकेगी


चुलबुली चाल गोदी मचलेगी


१४ बरसो के रात-दिन का जन्म


गोदी के ख़ाली नाम पुन्र प्रवेश का नमन


आधि बूंद की आदि बिजली का बंधन रमन


जनम दिन(रात) मुबारक हो ख़ाली जाम अमृतम अमन

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment