पडो

सास के दामाद की पढ़ाई बहुत हो

गयी gut गोदी तो पहले से हे डूबी पड़ी है

(पिछले, आज और आगे को मिला के

कलयुगा 2 कलयुगा

भरपूर ने तो इक ही काम भरना है)

दामाद तो हमेशा ही क्यों की निराशा

की आशा को ही पूरा पांडेगा

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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