अदर गवाया

भरपूर बचा भरपूर सो रहा है और

ख़ाली अंदर ख़ाली गोदी को देख के

(ख)रो रहा है

&

आधे जनम आज के अंदर गवाया

और १०० भरपूर आधा

इधर उधर पैदा भरवाया

अगली पिछली सास को भूल भुलाया

नेक ख्याल एक को आया

नकली माल को लाल करवाया

चल मेरे भाई तू भरपूर तुड़वाया

Published by

Unknown's avatar

mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

Leave a comment