भरते समये सोचते नहीं
और हर वक़्त भरने की सोचते रहते है
अब भला समय को ख़ाली से
नहीं कोई लेना देना
तो फिर भरपूर की तो सब
अपनी करनी अंदर भरनी है
भरते समये सोचते नहीं
और हर वक़्त भरने की सोचते रहते है
अब भला समय को ख़ाली से
नहीं कोई लेना देना
तो फिर भरपूर की तो सब
अपनी करनी अंदर भरनी है