आधे की देह की तेह जब ख़ाली होती है
तब to()tal देवी की काली आग आती है
आँखों को रात को रुला रोती है
पर एह क्या बाहर क्या देखती है
वा()ना
वा को ना नहीं भाती है
भरपूर हा सब को जगाती है
आधे की देह की तेह जब ख़ाली होती है
तब to()tal देवी की काली आग आती है
आँखों को रात को रुला रोती है
पर एह क्या बाहर क्या देखती है
वा()ना
वा को ना नहीं भाती है
भरपूर हा सब को जगाती है