किले को ख़ाली आज करना
बहुत ही आसान है अंदर
इक लात यह है की उससे कल की
तूतू मैं मैं का संत-ुलन बिगड़ता है
पर लगे रहो उन्ना भाई उन्न्दा खुश होगा
(पिछली सास ने क्या ख्याल खाया था याद है इधर उधर)
किले को ख़ाली आज करना
बहुत ही आसान है अंदर
इक लात यह है की उससे कल की
तूतू मैं मैं का संत-ुलन बिगड़ता है
पर लगे रहो उन्ना भाई उन्न्दा खुश होगा
(पिछली सास ने क्या ख्याल खाया था याद है इधर उधर)