अपवित्र

gut मईया की कोख के पवित्र

दिन रात के अँधेरे को अपवित्र

करते है वासना भरी सास के साथ

वासना से भरा मेहमान भगवन का रूप होता है

सुन लो लत

कितना झूठ लिखते है

भगवन का नाम लेने से दुख दूर होटल होते है

gut गोदी के घरो के अंदर वासना का होटल तो आज भी खुला है

un()not i-mag

ਜਾਕੋ ਰਾਖੇ ਸਾਈਆਂ ਮਾਰ ਸਕੇ ਨਾ ਕੋਈ

ਕੀਦੀ ਰੱਖ ਨੂੰ ਕੋਈ ਮਾਰ ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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