क्या तूतू मैं मैं की इज़्ज़त
gut गोदी के अंदर की
ख़ाली मईया से भी
ऊँची होती है
इसी लिए भोगी को वास की जरूरत होती है
सास दिन रात रोगी होती है
रो रो कर भी उड़ती रहती है
उड़ने का भोग भी संजोगी होती है
क्या तूतू मैं मैं की इज़्ज़त
gut गोदी के अंदर की
ख़ाली मईया से भी
ऊँची होती है
इसी लिए भोगी को वास की जरूरत होती है
सास दिन रात रोगी होती है
रो रो कर भी उड़ती रहती है
उड़ने का भोग भी संजोगी होती है