जिस घर में gut मईया नहीं उस घर में भगवन नहीं
मिटी का हो चाहे पथर का
मृगषरीर
for here is no gut mother nature within each breath’ lap, nor s’ood ()pace for god
कितने युगो से निवाला अंदर ही नहीं गया
जिस घर में gut मईया नहीं उस घर में भगवन नहीं
मिटी का हो चाहे पथर का
मृगषरीर
for here is no gut mother nature within each breath’ lap, nor s’ood ()pace for god
कितने युगो से निवाला अंदर ही नहीं गया