मनुष्य ने अपने स्वस्थ्य को
सवा(भरपूर)अस्थ
अदर का स्वाभिमान बना रखा है
अब अस्थिया तो विरा()मान
होगी ही
मनुष्य ने अपने स्वस्थ्य को
सवा(भरपूर)अस्थ
अदर का स्वाभिमान बना रखा है
अब अस्थिया तो विरा()मान
होगी ही
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खुद से ही दूर होजा मनुष्य
कोई नहीं तेरा अंदर शिष्य
भरपूर विष तेरा पूरा वैदुष्य
कैसे करेगा ख़ाली अंदर विषय
भरपूर सोने से तूतू में में की दुनिया सोना है
उगलती है
उठाती उंगली gut गोदी के अंदर
मेरे देश के धरती
सोना उगले उगले हीरे मोती
धरती के देश पूरे नियंत्रण करके लगे है
लदने में व्यस्त सोने के लिए
अब लातो को भी याद नहीं रहता
भरपूर दिन भरपूर रात से ma()ch करते है क्या
दिन की _er_ing ३ है तो रात की भी ३ ही होगी
बहार ले परिणाम अंदर लेन-देन से क्या फायदा
पहले अंदर के किले की हार-जीत को परखो
यह तो किसी ने धरा ही नहीं आज तक
पार हार-जीत से भी की होगा
अब इधर उधर की तूतू में में की यारी को ही ले लो
क्या फैला रही है गोदी में
अपनी बीमारी को कैसे बैठाना है यह तो सास के दामाद को खड़ा होना है
भरपूर बीमा(या)रियो की सेवाओं में उपस्थित होके भरपूर को ऊँचा दिखाना है
घर के अंदर इसी लिए यारीया भी गहरी डूबी हुई है
तल के चमड़ी पर तो पूरी चमक है
इसका बल मत बीमा पक्का है
चालीस चोरो ने एक बाबा का सारा सड़ा हुआ तेल पी लिया
उससे क्या होगा बाबे के बाबायो का
भरपूर नाम रोशन हुया
बेताल और बाबा का ma()ch कैसा रहेगा
अंत तो ख़ाली ही है न अंदर
a mo()il fo()n _as ac_ess
y in()id u is-sue un()not
re_eal gut _ur()ace()all
toi_et_ ti-sue
ख़ाली gut मईया को
तूतू में में दुनिया के भरपूर भगवन से ड-राते है
जो रात को gut गोदी की
डाट में नहीं लौटता
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