गोदी को भरपूर पिछवाड़ा दिखा
के आखो के सामने को
भरपूर फक्र होता है
गोदी को भरपूर पिछवाड़ा दिखा
के आखो के सामने को
भरपूर फक्र होता है
आधा जन्म की बिदाई के लिये
त्यार है सब कैसा
दिखेगा भरपूर लुटा अन्न
gut गोदी के अंदर
कहते है हर मुश्किल का हल
बीच में ही होता है
भरपूर बीमा(या)रियो का हल
करेगा gut गोदी की भरपूर खेती का
ख़ाली बल
ever-y-thing on wor_d
exi_tence is _ol on()ess
man-y in()id gut _ur()ace()all
_ow
y in()id u @er _not no adhe
आखे भी थर थर्रायेगी उठे न
भरपूर भाड़े के अदर बाधे
ne*t s_op
_ean-er _outh
मनुष्य ने अपने स्वस्थ्य को
सवा(भरपूर)अस्थ
अदर का स्वाभिमान बना रखा है
अब अस्थिया तो विरा()मान
होगी ही
y in(out)id u 100%
is
a-lon u wit()in .01%
th@ an end this is beginning
is ever- -thing fullness in(out)id
end is emptee nothing
खुद से ही दूर होजा मनुष्य
कोई नहीं तेरा अंदर शिष्य
भरपूर विष तेरा पूरा वैदुष्य
कैसे करेगा ख़ाली अंदर विषय
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